Thursday, November 28, 2019

नशे के सौदागरों को नशा पीड़ित का पत्र

प्रिय नशे के सौदागरों,
मुझे आज तुम्हे ये पत्र लिखते हुए तुम पर गुस्सा नही तरस ज्यादा आ रहा है क्योंकि जो काम तुम कर रहे हो उसके अंजाम की तुम्हे खबर भी नहीं है। आज जो तुम थोड़े नही बहुत सारे पैसे जल्दी से कमाने के लिए ये जो ज़हर समाज में बेच रहे हो ये केवल हमारे बच्चों को ही नहीं मारेगा इसमें तुम्हारे बच्चे भी मारे जायेंगे इसका मैं खुद गवाह हूँ। यकीन नहीं हो तो पंचशील नगर में स्मैक बेचने वाली शैली के परिवार का हाल जान लो। उसने आज से 15 साल पहले जल्दी अमीर बनने और अपने दो बच्चे जिसमे एक बेटा और एक बेटी थे को अच्छी सुविधाएँ देने के लिए स्मैक बेचना शुरू किया उसने पैसा भी कमाया पर जल्द ही उसका बेटा भी स्मैक की चपेट में आ गया और उसकी बेटी ने उसी के स्मैक के ग्राहक से शादी कर ली। आज उसका बेटा और दामाद स्मैक के ओवरडोज़ से मारे जा चुके है और उसकी बेटी और बहू दोनों विधवा हो चुकी है। ये हश्र तुम्हारे बच्चों का भी हो सकता है।
तुम्हे अंदाजा तो होगा ड्रग्स निरोधक कानून एन डी पी एस एक्ट का जिस दिन फंसोगे न तो महीनों जेल में सड़ोगे ये सही बात है कि गवाहों के बयान पलटने के कारण शायद कुछ महीने में बाहर आ जाओ पर उसके बात समाज तुम्हे किस गन्दी नजरों से देखेगा इसकी तुम्हे कल्पना भी नहीं है कोई तुम्हारे बच्चों से शादी भी नहीं करेगा।
देखना तुम्हारे बच्चे भी तुम्हे देखकर ड्रग्स बेचने के कारोबार में लग जायेंगे और ईश्वर ने चाहा तो एक दिन तुम्हारे बच्चे भी ड्रग्स के साथ पकडे जाकर तुम्हारे साथ जेल जायेंगे फिर क्या जवाब दोगे तुम उन्हें ?

अभी तो तुम्हे बेचने में मज़ा आ रहा है क्योंकि मिलीभगत से तुम लोग बेच ले रहे हो पर कभी तुमने सोचा है कि आसान तरीके से ज्यादा पैसा कमाने की तुम्हारी लालसा के कारण तुम्हारी ड्रग्स से कितने परिवार बर्बाद हो रहे है, कितने लोगों के सपने टूट रहे है जो उन्होंने अपने बच्चों के भविष्य के लिए देखे थे और खुद के लिए देखे थे, कितने बच्चे नर्क का जीवन जीने को मजबूर हो गए है, कितने लोगों के घरों के चिरागों को तुमने बुझा दिया है, ड्रग्स के नशे में लोगों से कितने अपराध हो रहे है और कितने लोग बीमारियों से ग्रसित हो गए है ? आज पैसे की चमक के कारण तुम इस बारे में नहीं सोच पा रहे हो पर देखना एक दिन तुम्हारा जमीर तुम्हे जरूर कटोचेगा कि ये मैंने क्या कर दिया, फिर उससे कैसे भागोगे उसको पैसा नही खिला पाओगे।

अभी तुम्हे फिलीपींस का हाल शायद मालूम नहीं होगा जहाँ के राष्टपति रोड्रिगो दुतेर्ते ने शासन सँभालते ही हजारों ड्रग्स बेचने वालों को ढूंढ ढूंढ कर घरों से निकल निकाल कर मार डाला था ईश्वर करे ऐसा कोई शासक भारत में भी आ जाये और तुम सभी अपने परिवार सहित मार डाले जाओ क्योंकि मैं जानता हूँ तुम लोगों के कारण लाखों लोग मर रहे है। ये मौतें नहीं तुम्हारे द्वारा की गई हत्याएं है। तुम लोगों का पूरा परिवार नशे के कारोबार में लिप्त रहता है तुम्हे तुम्हारे परिवार सहित मार दिया जाना चाहिए।
ईश्वर से प्रार्थना है कि इससे पहले कि ये सब तुम्हारे साथ हो तुम लोग सुधर जाओ और ड्रग्स बेचने के काम से तौबा कर लो।

                                            तुम्हारा शुभचिंतक
                                               राजीव तिवारी
                                   तुम्हारी बेची ड्रग्स का  शिकार।

Sunday, November 3, 2019

अच्छे पढ़े लिखे और समझदार लोग भी नशे में फंसने के बाद नहीं निकल पाते है।

हमें अपने बीच लगातार ऐसे लोग दिखते है जो लोगों को स्वास्थ्य संबंधी सलाह दे रहे होते है, पढे लिखे होते है जैसे डॉक्टर, इंजीनियर, आई ए एस, आई पी एस जो समाज में अच्छा कार्य कर रहे होते है कसरत भी लड़ते है और अपने स्वास्थ्य का ध्यान भी रखते है पर वे भी सिगरेट और गुटखा खाते हुए दिख जाते है। क्या कारण है इसका ? इसके नुकसानों को जानते हुए भी ये लोग क्यों पी रहे है ? इस बात की गहराई में जायेंगे तो जानेंगे की ये लोग भी अब इसको नही पीना और खाना चाहते है पर जिस छोटी उम्र में इन्होंने किसी दूसरे छोटे बच्चे के कहने पर जिज्ञासावश लेना शुरू किया था उस वक्त ये इसके नुकसानों के बारे में नहीं जानते थे और न ही जीवन भर पीना चाहते थे वे तो बस एक बार लेकर देखना चाहते थे। किंतु जैसा की तम्बाखू के अंदर गुण है उसको लेने के बाद मस्तिष्क में डोपेमिन नाम का हार्मोन निकलता है जो व्यक्ति को अच्छा महसूस करवाता है और फिर वो इसमें फंसता चला जाता है।
तंबाकू की शारीरिक और मानसिक निर्भरता बहुत अधिक होती है इसको लेना शुरू करने के बाद यह बहुत तेजी से व्यक्ति की निर्भरता बढ़ाता है इसकी निर्भरता कोकीन और हेरोइन की तरह ही होती है जिस कारण यदि वह बंद करना भी चाहे तो उसको शारीरिक निर्भरता के कारण शारीरिक कष्ट होता है और उसके मस्तिष्क के कारण कुछ भी अच्छा नही लगता है जिस कारण वो चाह कर भी उसको बंद नही कर पाता है।
इसको एक बार शुरू करने के बाद चिकित्सा और विशेषज्ञ की मदद के बाद भी छोड़ना मुश्किल होता है इसीलिए इस ज़हर से समाज को बचाने के लिए आवश्यक है कि हम बच्चों को इसके नुकसानों के बारे में शुरू करने से पहले जागरूक करें क्योंकि यदि उन्होंने एक बार इसे ले लिया तो फिर बंद करना असंभव जैसा है । देश् में हर साल 20 लाख लोग तम्बाखू से मर रहे है पर वे इसे बंद नही कर पाते।
धूम्रपान कैसे बंद करें जानने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें-
https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=2349183701806696&id=1027277323997347
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सक्रिय धूम्रपान से ज्यादा असक्रिय धूम्रपान है।

यह एक आम भारतीय परिवार का प्रतिनिधित्व करता चित्र है जिसमे घर का मुखिया जो अधिकतर पुरुष होता है घर में ही सबके बीच बीड़ी या सिगरेट का सेवन कर रहा होता है उसको अंदाजा ही नही होता की वो अपने परिवार को क्या नुकसान पहुंचा रहा है। चिकित्सा शास्त्र की भाषा में धूम्रपान/स्मोकिंग दो तरह से होते है पहला सक्रीय या एक्टिव स्मोकिंग दूसरा असक्रिय या पैसिव स्मोकिंग। जब कोई व्यक्ति सिगरेट या बीड़ी पी रहा होता है उसे एक्टिव स्मोकिंग कहते है और जो धुआं वो छोड़ रहा होता है वो किसी अन्य व्यक्ति जो धूम्रपान नही कर रहा है के सांस लेने के दौरान उसके शरीर में जाता है इसे असक्रिय या पैसिव स्मोकिंग कहते है। डॉक्टर्स के अनुसार सिगरेट पीने वाले की तुलना में न पीने वाले को उसके धुंए से ज्यादा नुकसान होता है क्योंकि उसका शरीर उस धुंए का अभ्यस्त नही होता है। हमारे यहाँ 80% कैंसर का मुख्य कारण तम्बाखू होता है। इसके अतिरिक्त धूम्रपान के कारण सांस संबंधी बहुत सी बीमारियां हो जाती है जिस कारण व्यक्ति की कार्यक्षमता कम हो जाती है। सर्वे यह बताते है कि पैसिव स्मोकिंग या असक्रिय धूम्रपान करने वाले के शरीर में तम्बाखू का धुआं जाने के कारण उसको भी कैंसर और अन्य सांस संबंधी बीमारियां हो जाती है तथा उनकी भी काम करने की क्षमता कम हो जाती है। एक और सर्वे यह बताता है कि अभी तक लगभग 50 लाख लोगों की मौत पैसिव स्मोकिंग/असक्रिय धूम्रपान के कारण हो गयी है और इसका घटना स्थल अधिकांशतः उनका घर था जहाँ कोई परिजन धूम्रपान करता था जिसका धुआं उनके शरीर में जाता था या उसका कार्यस्थल था जहाँ उसका सहकर्मी धूम्रपान करता था। जिस परिवार में बच्चे बड़ों को धूम्रपान करते हुए देखता है उनके भी करने की संभावना ज्यादा होती है।
यह बंद होना चाहिए।

नशा बीमार को अपराधी बना देता है।

ये हमारे समाज में होने वाली एक आम घटना है जिसमे दोस्त, सहकर्मी या रिश्तेदार मज़ा करने के लिए या कोई ख़ुशी साथ में शराब पी रहे होते है और ज्यादा पी लेने पर उनमें आपस में ही विवाद हो जाता है जिसकी परिणीति ऐसी या इससे भी भयंकर घटना के रूप में आम होती रहती है। आये दिन हम पड़ते है शराब पीने के दौरान सेल ने जीजा की, दोस्त ने दोस्त की, भाई ने भाई की या साथ काम करने वाले की हत्या कर दी और जब इन घटनाओं की गहराई में जाये तो पता चलता है कि दोनों पक्षों में किसी तरह की कोई दुश्मनी नही थी बल्कि बहुत अच्छे संबंध थे बस ज्यादा पी लेने के बाद किसी छोटी सी बात पर विवाद हो गया और नशे नशे में घटना घट गयी। अधिकांश तो शराब के झगडे वाले लोग अपराधी प्रवत्ति के लोग भ8 नही होते है ये भी सभ्य समाज का हिस्सा होते है बस नशे में इनसे ऐसा हो गया।
एक सर्वे बताता है कि कुल अपराधों में से लगभग 40% अपराधों के पीछे शराब या ड्रग्स का हाथ होता है और ये नशे में अपराध करने वाले अधिकांशतः गैर आपराधिक प्रवत्ति के होते है। ये वो लोग होते है जिन्हें एडिक्शन नाम की बीमारी होती है जिसका मरीज अपने नशे पर नियंत्रण खो चुका होता है, उसका नशा लगातार बढ़ रहा होता है और वो शारीरिक और मानसिक रूप से उस पर निर्भर हो चुका होता है। अपनी इस बीमारी के कारण ये लोग इतनी अधिक मात्रा में नशा कर लेते है कि उसके बाद इनका अपने मस्तिष्क पर से नियंत्रण समाप्त हो जाता है।जिसको एडिक्शन की बीमारी हो जाती है वो चाह कर भी अपना नशा बंद नही कर पता है क्योंकि निर्भरता के कारण बंद करने पर उसको तकलीफ होती है।
यदि आपके नजदीक कोई ऐसा व्यक्ति है जो इतना नशा कर लेता है कि फिर अपने नियंत्रण में नही रहता है तो उसका उपचार कराएं वो बीमार है, ये उसके लिए मदद होगी अन्यथा वो भी किसी अपराध में फंस सकता है।


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Thursday, October 31, 2019

धूम्रपान से खुद के साथ दूसरों को भी नुकसान पहुंचा रहे है।

यह एक आप भारतीय परिवार का प्रतिनिधित्व करता चित्र है जिसमे घर का मुखिया जो अधिकतर पुरुष होता है घर में ही सबके बीच बीड़ी या सिगरेट का सेवन कर रहा होता है उसको अंदाजा ही नही होता की वो अपने परिवार को क्या नुकसान पहुंचा रहा है। चिकित्सा शास्त्र की भाषा में धूम्रपान/स्मोकिंग दो तरह से होते है पहला सक्रीय या एक्टिव स्मोकिंग दूसरा असक्रिय या पैसिव स्मोकिंग। जब कोई व्यक्ति सिगरेट या बीड़ी पी रहा होता है उसे एक्टिव स्मोकिंग कहते है और जो धुआं वो छोड़ रहा होता है वो किसी अन्य व्यक्ति जो धूम्रपान नही कर रहा है के सांस लेने के दौरान उसके शरीर में जाता है इसे असक्रिय या पैसिव स्मोकिंग कहते है। डॉक्टर्स के अनुसार सिगरेट पीने वाले की तुलना में न पीने वाले को उसके धुंए से ज्यादा नुकसान होता है क्योंकि उसका शरीर उस धुंए का अभ्यस्त नही होता है। हमारे यहाँ 80% कैंसर का मुख्य कारण तम्बाखू होता है। इसके अतिरिक्त धूम्रपान के कारण सांस संबंधी बहुत सी बीमारियां हो जाती है जिस कारण व्यक्ति की कार्यक्षमता कम हो जाती है। सर्वे यह बताते है कि पैसिव स्मोकिंग या असक्रिय धूम्रपान करने वाले के शरीर में तम्बाखू का धुआं जाने के कारण उसको भी कैंसर और अन्य सांस संबंधी बीमारियां हो जाती है तथा उनकी भी काम करने की क्षमता कम हो जाती है। एक और सर्वे यह बताता है कि अभी तक लगभग 50 लाख लोगों की मौत पैसिव स्मोकिंग/असक्रिय धूम्रपान के कारण हो गयी है और इसका घटना स्थल अधिकांशतः उनका घर था जहाँ कोई परिजन धूम्रपान करता था जिसका धुआं उनके शरीर में जाता था या उसका कार्यस्थल था जहाँ उसका सहकर्मी धूम्रपान करता था। जिस परिवार में बच्चे बड़ों को धूम्रपान करते हुए देखता है उनके भी करने की संभावना ज्यादा होती है।
अतः आवश्यकता है कि हम हमारे आस पास के लोगों को इस बारे में जागरूक करें और यदि स्वयं ऐसा करते है तो इसको तुरंत बंद करें ये हमारे साथ साथ हमारे करीबियों को नुकसान पहुंचा रहा है। इस नुकसान को रोकने के लिए ही कानून में सार्वजानिक रूप से पीना प्रतिबंधित है।
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यह एक आप भारतीय परिवार का प्रतिनिधित्व करता चित्र है जिसमे घर का मुखिया जो अधिकतर पुरुष होता है घर में ही सबके बीच बीड़ी या सिगरेट का सेवन कर रहा होता है उसको अंदाजा ही नही होता की वो अपने परिवार को क्या नुकसान पहुंचा रहा है। चिकित्सा शास्त्र की भाषा में धूम्रपान/स्मोकिंग दो तरह से होते है पहला सक्रीय या एक्टिव स्मोकिंग दूसरा असक्रिय या पैसिव स्मोकिंग। जब कोई व्यक्ति सिगरेट या बीड़ी पी रहा होता है उसे एक्टिव स्मोकिंग कहते है और जो धुआं वो छोड़ रहा होता है वो किसी अन्य व्यक्ति जो धूम्रपान नही कर रहा है के सांस लेने के दौरान उसके शरीर में जाता है इसे असक्रिय या पैसिव स्मोकिंग कहते है। डॉक्टर्स के अनुसार सिगरेट पीने वाले की तुलना में न पीने वाले को उसके धुंए से ज्यादा नुकसान होता है क्योंकि उसका शरीर उस धुंए का अभ्यस्त नही होता है। हमारे यहाँ 80% कैंसर का मुख्य कारण तम्बाखू होता है। इसके अतिरिक्त धूम्रपान के कारण सांस संबंधी बहुत सी बीमारियां हो जाती है जिस कारण व्यक्ति की कार्यक्षमता कम हो जाती है। सर्वे यह बताते है कि पैसिव स्मोकिंग या असक्रिय धूम्रपान करने वाले के शरीर में तम्बाखू का धुआं जाने के कारण उसको भी कैंसर और अन्य सांस संबंधी बीमारियां हो जाती है तथा उनकी भी काम करने की क्षमता कम हो जाती है। एक और सर्वे यह बताता है कि अभी तक लगभग 50 लाख लोगों की मौत पैसिव स्मोकिंग/असक्रिय धूम्रपान के कारण हो गयी है और इसका घटना स्थल अधिकांशतः उनका घर था जहाँ कोई परिजन धूम्रपान करता था जिसका धुआं उनके शरीर में जाता था या उसका कार्यस्थल था जहाँ उसका सहकर्मी धूम्रपान करता था। जिस परिवार में बच्चे बड़ों को धूम्रपान करते हुए देखता है उनके भी करने की संभावना ज्यादा होती है। अतः आवश्यकता है कि हम हमारे आस पास के लोगों को इस बारे में जागरूक करें और यदि स्वयं ऐसा करते है तो इसको तुरंत बंद करें ये हमारे साथ साथ हमारे करीबियों को नुकसान पहुंचा रहा है। इस नुकसान को रोकने के लिए ही कानून में सार्वजानिक रूप से पीना प्रतिबंधित है। धूम्रपान कैसे बंद करें जानने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें- https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=2349183701806696&id=1027277323997347

Wednesday, October 16, 2019

स्मैक पीने वाले तेज़ी से HIV पॉजिटिव हो रहे है।

पिछले कुछ सालों में स्मैक या ब्राउन शुगर मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, गुजरात और उत्तर प्रदेश में छोटे छोटे कस्बों में भी पैर पसार चुका है इसके एक डोज़ को टिकट कहा जाता है स्वर्ग का टिकट क्योंकि यह व्यक्ति को उड़ा देता है या कहें कि वो इसको पीकर खुद को उडाता हुआ भी महसूस कर सकता है। स्मैक जब बच्चे और युवा पीना शुरू करते है तो पहले वो उसे सिल्वर फॉयल जो की खाना पैक करने वाली पन्नी होती है उस पर जला कर उसका धुआं पीते है और धीरे धीरे उसका डोज़ बढ़ता चला जाता है जो नशा पहले  जब एक टिकट में होता था वही नशा धीरे धीरे दो फिर तीन टिकट में होने लगता है और लगातार बढ़ता चला जाता है। जब व्यक्ति धीरे धीरे इसका एडिक्ट हो जाता है तो इसकी उच्च शारीरिक और मानसिक निर्भरता होती है। इसका एडिक्ट होने के बाद व्यक्ति यदि नशा न करे तो उसको बहुत तकलीफ होती है जिस कारण उसको किसी भी हालात में ये करना होता है। ज्यादा नशा करने के कारण स्मेकिये या पाउडरिये का काम धंधा सब बंद हो जाता है और वो लोगों से उधार लेना शुरू कर देते है और जब यह रास्ता भी बंद लोग भी अच्छे से जान जाते है कि यह उधार  पैसे का इंतेज़ाम करने में भी दिक्कत होने लगती है तो चोरी छिना झपटी का भी दौर आ जाता है। यहाँ ये बात खास जानने योग्य है कि जब उनके पास पैसों की बहुत कमी हो जाती है तो वे पन्नी पर जलाकर पीने की जगह स्मैक को एविल के इंजेक्शन को गर्म करके उसमें मिलकर हाथों में इंजेक्शन द्वारा लेने लगते है। इस तरीके से लेने पर पन्नी से पीने पर जो नशा 4 टिकट में होता उससे ज्यादा नशा एक टिकट में हो जाता है। यहाँ पैसे तो बचने लगते है चार की जगह एक में ही काम हो जाता है किंतु जब ये समूह में नशा कर रहे होते है तो बहुत बार ये अनजाने में या जानबूझकर एक ही सिरिंज से इंजेक्ट कर लेते है और एक दूसरे को अपनी बीमारियां हस्तांतरित कर देते है। नशा मुक्ति केंद्रों में भर्ती होने वाले इन मरीजों में देखा गया है कि इंजेक्ट करने वाले हर दस में से दो मरीज एच आई वी पॉजिटिव (HIV Positive) निकल रहे है और इनको पता चल चुका है कि इनको HIV हो गया है तो इनके मन में अब कोई आशा भी नही रह गयी है और ये डूब कर नशा कर रहे है और इस रोग को तेजी से फैला रहे है। इनको चिन्हित कर के यदि अलग नहीं किया गया, जो पी रहे है उनका उपचार द्वारा रोका नही गया और स्मैक की उपलब्धता पर लगाम नही लगी तो जो हालात पंजाब में बन रहे है वही यहाँ भी होंगे।
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Monday, October 14, 2019

खुद पिता अपने बच्चों को तम्बाखू के जाल में फंसा रहे है।

आम तौर पर पान की दुकानों पर हमें ऐसे लोग दिख जायेंगे जो अपने लिए सिगेरट, बीड़ी या गुटखा लेने आते है तो अपने साथ छोटे बच्चों को भी ले आते है, ये लोग जानते नहीं है कि इसका उस बाल मन पर क्या प्रभाव पड़ रहा है। कहीं न कहीं ये बच्चा भविष्य का तम्बाखू उपयोगकर्ता बनने के लिए तैयार हो रहा है। दूसरे बच्चों की तुलना में उन बच्चे के तम्बाखू उपयोग करने की संभावना ज्यादा हो जाती है जिनके माता पिता तम्बाखू का उपयोग उनके सामने करते है, उनको बचपन से अपने साथ पान की दुकानों में ले जाते है और बहुत बार उनको अकेले लेने भी भेजते है।
सभी गुटखे के पाउच बहुत आकर्षक रंग के होते है जो की बच्चों को आकर्षित करते है और उनके अवचेतन मन में उसके उपयोग की उत्सुकता पैदा करते है। जब पिता द्वारा ही उनको अपने साथ ले जाया जाता है तो उस दुकान पर जाना उसके लिए सामान्य सी बात हो जाती है अन्य बच्चों की तरह उसके अंदर हिचक नहीं होती है। जैसे ही उसकी पहुँच पैसो तक होती है उसका मन अपनी तम्बाखू लेकर देखने की इच्छा पूरी करने का होने लगता है और मौका मिलते ही वह खरीद लाता है और चूंकि बचपन से ही अपने पिता को उपयोग करते देख रहा होता है इस कारण उसको कैसे उपयोग करना है यह बखूबी उसको आता है।
हम जानते है कि कोई भी व्यक्ति जो खुद तम्बाखू के जाल में फंस गया है उनको लेना उसकी मजबूरी बन चुकी है वो कभी भी नहीं चाहेगा कि उसका बच्चा इसमें फंस जाये क्योंकि अब उसको खुद को नुकसान होने शुरू हो चुके होते है पर वो अनजाने ही अपने बच्चे को इसमें फंसाने की पृष्ठभूमि तैयार कर देता है।
हमारे देश में हर साल 20 लाख लोग तम्बाखू से मर रहे है तम्बाखू का सेवन करोड़ों लोगों को बीमार किये हुए है और उनकी कार्यक्षमता कम करता जा रहा है जो इसमें फंस गए है उनका निकल पाना बहुत मुश्किल है पर यदि हमें आने वाली पीढ़ी को इसके प्रकोप से बचाना है तो हमें अपने बच्चों को इसके नुकसानों के प्रति जागरूक करना होगा और यदि हम खुद इसमें फंसे हुए है तो विशेषज्ञ के माध्यम से इसमें से निकलने की कोशिश करें और अपने बच्चों के सामने उपयोग से बचे और न उनको पान गुटखा की दुकान में ले जाये और न उनको अपने लिए लेने भेजें। यदि आपका कोई परिचित भी अपने बच्चे को लेकर तम्बाखू की दुकान पर जाता है या उससे मंगवाता है तो उसे समझाएं।
राजीव तिवारी, एडिक्शन काउंसलर, शुद्धि नशा मुक्ति केंद्र, भोपाल, 9981665001
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सिगरेट एवं गुटखा से मुक्ति
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बस एक दिन के लिए नशा बंद

नशे से मुक्ति हेतु अमेरिकन फ़ेलोशिप अल्कोहोलिक्स एनोनिमस ने "एक बार में एक दिन" की नई अवधारणा दी जो सबसे सफल साबित हुई है। कहावत ह...