ये हमारे समाज में होने वाली एक आम घटना है जिसमे दोस्त, सहकर्मी या रिश्तेदार मज़ा करने के लिए या कोई ख़ुशी साथ में शराब पी रहे होते है और ज्यादा पी लेने पर उनमें आपस में ही विवाद हो जाता है जिसकी परिणीति ऐसी या इससे भी भयंकर घटना के रूप में आम होती रहती है। आये दिन हम पड़ते है शराब पीने के दौरान सेल ने जीजा की, दोस्त ने दोस्त की, भाई ने भाई की या साथ काम करने वाले की हत्या कर दी और जब इन घटनाओं की गहराई में जाये तो पता चलता है कि दोनों पक्षों में किसी तरह की कोई दुश्मनी नही थी बल्कि बहुत अच्छे संबंध थे बस ज्यादा पी लेने के बाद किसी छोटी सी बात पर विवाद हो गया और नशे नशे में घटना घट गयी। अधिकांश तो शराब के झगडे वाले लोग अपराधी प्रवत्ति के लोग भ8 नही होते है ये भी सभ्य समाज का हिस्सा होते है बस नशे में इनसे ऐसा हो गया।
एक सर्वे बताता है कि कुल अपराधों में से लगभग 40% अपराधों के पीछे शराब या ड्रग्स का हाथ होता है और ये नशे में अपराध करने वाले अधिकांशतः गैर आपराधिक प्रवत्ति के होते है। ये वो लोग होते है जिन्हें एडिक्शन नाम की बीमारी होती है जिसका मरीज अपने नशे पर नियंत्रण खो चुका होता है, उसका नशा लगातार बढ़ रहा होता है और वो शारीरिक और मानसिक रूप से उस पर निर्भर हो चुका होता है। अपनी इस बीमारी के कारण ये लोग इतनी अधिक मात्रा में नशा कर लेते है कि उसके बाद इनका अपने मस्तिष्क पर से नियंत्रण समाप्त हो जाता है।जिसको एडिक्शन की बीमारी हो जाती है वो चाह कर भी अपना नशा बंद नही कर पता है क्योंकि निर्भरता के कारण बंद करने पर उसको तकलीफ होती है।
यदि आपके नजदीक कोई ऐसा व्यक्ति है जो इतना नशा कर लेता है कि फिर अपने नियंत्रण में नही रहता है तो उसका उपचार कराएं वो बीमार है, ये उसके लिए मदद होगी अन्यथा वो भी किसी अपराध में फंस सकता है।
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