Thursday, October 31, 2019

धूम्रपान से खुद के साथ दूसरों को भी नुकसान पहुंचा रहे है।

यह एक आप भारतीय परिवार का प्रतिनिधित्व करता चित्र है जिसमे घर का मुखिया जो अधिकतर पुरुष होता है घर में ही सबके बीच बीड़ी या सिगरेट का सेवन कर रहा होता है उसको अंदाजा ही नही होता की वो अपने परिवार को क्या नुकसान पहुंचा रहा है। चिकित्सा शास्त्र की भाषा में धूम्रपान/स्मोकिंग दो तरह से होते है पहला सक्रीय या एक्टिव स्मोकिंग दूसरा असक्रिय या पैसिव स्मोकिंग। जब कोई व्यक्ति सिगरेट या बीड़ी पी रहा होता है उसे एक्टिव स्मोकिंग कहते है और जो धुआं वो छोड़ रहा होता है वो किसी अन्य व्यक्ति जो धूम्रपान नही कर रहा है के सांस लेने के दौरान उसके शरीर में जाता है इसे असक्रिय या पैसिव स्मोकिंग कहते है। डॉक्टर्स के अनुसार सिगरेट पीने वाले की तुलना में न पीने वाले को उसके धुंए से ज्यादा नुकसान होता है क्योंकि उसका शरीर उस धुंए का अभ्यस्त नही होता है। हमारे यहाँ 80% कैंसर का मुख्य कारण तम्बाखू होता है। इसके अतिरिक्त धूम्रपान के कारण सांस संबंधी बहुत सी बीमारियां हो जाती है जिस कारण व्यक्ति की कार्यक्षमता कम हो जाती है। सर्वे यह बताते है कि पैसिव स्मोकिंग या असक्रिय धूम्रपान करने वाले के शरीर में तम्बाखू का धुआं जाने के कारण उसको भी कैंसर और अन्य सांस संबंधी बीमारियां हो जाती है तथा उनकी भी काम करने की क्षमता कम हो जाती है। एक और सर्वे यह बताता है कि अभी तक लगभग 50 लाख लोगों की मौत पैसिव स्मोकिंग/असक्रिय धूम्रपान के कारण हो गयी है और इसका घटना स्थल अधिकांशतः उनका घर था जहाँ कोई परिजन धूम्रपान करता था जिसका धुआं उनके शरीर में जाता था या उसका कार्यस्थल था जहाँ उसका सहकर्मी धूम्रपान करता था। जिस परिवार में बच्चे बड़ों को धूम्रपान करते हुए देखता है उनके भी करने की संभावना ज्यादा होती है।
अतः आवश्यकता है कि हम हमारे आस पास के लोगों को इस बारे में जागरूक करें और यदि स्वयं ऐसा करते है तो इसको तुरंत बंद करें ये हमारे साथ साथ हमारे करीबियों को नुकसान पहुंचा रहा है। इस नुकसान को रोकने के लिए ही कानून में सार्वजानिक रूप से पीना प्रतिबंधित है।
धूम्रपान कैसे बंद करें जानने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें-
https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=2349183701806696&id=1027277323997347
यह एक आप भारतीय परिवार का प्रतिनिधित्व करता चित्र है जिसमे घर का मुखिया जो अधिकतर पुरुष होता है घर में ही सबके बीच बीड़ी या सिगरेट का सेवन कर रहा होता है उसको अंदाजा ही नही होता की वो अपने परिवार को क्या नुकसान पहुंचा रहा है। चिकित्सा शास्त्र की भाषा में धूम्रपान/स्मोकिंग दो तरह से होते है पहला सक्रीय या एक्टिव स्मोकिंग दूसरा असक्रिय या पैसिव स्मोकिंग। जब कोई व्यक्ति सिगरेट या बीड़ी पी रहा होता है उसे एक्टिव स्मोकिंग कहते है और जो धुआं वो छोड़ रहा होता है वो किसी अन्य व्यक्ति जो धूम्रपान नही कर रहा है के सांस लेने के दौरान उसके शरीर में जाता है इसे असक्रिय या पैसिव स्मोकिंग कहते है। डॉक्टर्स के अनुसार सिगरेट पीने वाले की तुलना में न पीने वाले को उसके धुंए से ज्यादा नुकसान होता है क्योंकि उसका शरीर उस धुंए का अभ्यस्त नही होता है। हमारे यहाँ 80% कैंसर का मुख्य कारण तम्बाखू होता है। इसके अतिरिक्त धूम्रपान के कारण सांस संबंधी बहुत सी बीमारियां हो जाती है जिस कारण व्यक्ति की कार्यक्षमता कम हो जाती है। सर्वे यह बताते है कि पैसिव स्मोकिंग या असक्रिय धूम्रपान करने वाले के शरीर में तम्बाखू का धुआं जाने के कारण उसको भी कैंसर और अन्य सांस संबंधी बीमारियां हो जाती है तथा उनकी भी काम करने की क्षमता कम हो जाती है। एक और सर्वे यह बताता है कि अभी तक लगभग 50 लाख लोगों की मौत पैसिव स्मोकिंग/असक्रिय धूम्रपान के कारण हो गयी है और इसका घटना स्थल अधिकांशतः उनका घर था जहाँ कोई परिजन धूम्रपान करता था जिसका धुआं उनके शरीर में जाता था या उसका कार्यस्थल था जहाँ उसका सहकर्मी धूम्रपान करता था। जिस परिवार में बच्चे बड़ों को धूम्रपान करते हुए देखता है उनके भी करने की संभावना ज्यादा होती है। अतः आवश्यकता है कि हम हमारे आस पास के लोगों को इस बारे में जागरूक करें और यदि स्वयं ऐसा करते है तो इसको तुरंत बंद करें ये हमारे साथ साथ हमारे करीबियों को नुकसान पहुंचा रहा है। इस नुकसान को रोकने के लिए ही कानून में सार्वजानिक रूप से पीना प्रतिबंधित है। धूम्रपान कैसे बंद करें जानने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें- https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=2349183701806696&id=1027277323997347

No comments:

Post a Comment

बस एक दिन के लिए नशा बंद

नशे से मुक्ति हेतु अमेरिकन फ़ेलोशिप अल्कोहोलिक्स एनोनिमस ने "एक बार में एक दिन" की नई अवधारणा दी जो सबसे सफल साबित हुई है। कहावत ह...