जब एक व्यक्ति पहले बार कोई नशा करता है तब निश्चित ही उसे अच्छा महसूस होता है इसी कारण वह दुबारा करता है यह अच्छा लगना उसे एक तरह की शक्ति प्रदान करता है जैसे शराब पीकर वह व्यक्ति भी नाचने लगता है जो शादियों में हमेशा से एक कोने में खड़ा रहता था और शराब पीकर काम बोलने वाला संकोची व्यक्ति भी अपनी बात निःसंकोच करने लगता है। इसी तरह गांजा भी एकाग्रता बढा देता है आजकल छात्रों के बीच रात भर पड़ने के लिए गांजा बहुत लोकप्रिय हो रहा है।
बहुत से खेलों में हम खिलाडियों के डोप टेस्ट में पकडे जाने की घटनाएं सुनते है जिसमे उनके ड्रग्स लेने की बात सामने आती है जो की उनके द्वारा अपना स्टेमिना बढ़ाने के लिए ली जातीं है।
इन बातों को देखकर हम कह सकते है की मादक पदार्थ में गन होता है कि वे कहीं न कहीं शक्ति प्रदान करते है पर दिक्कत इनके एक और गुण से है वो यह है कि ये एडिक्टिव होती है जिस कारण शरीर और मस्तिष्क इनके ऊपर निर्भर होता चला जाता है और जब तक इनके न ले लो शारीर सामान्य रूप से कार्य नहीं कर पाता है। हम देखते है न की जो सिगरेट व्यक्ति को एकाग्रता और ज्यादा देर तक कार्य करने की शक्ति देता है एक दिन ये आता है कि जब तक यह नहीं मिल जाये वह मल त्याग भी नही कर पता है उसको इस अति साधारण प्राकृतिक कार्य के लिए भी सिगेरट की जरूरत पड़ती है। इनकी मात्रा लगातार बढ़ती जाती है। जो व्यक्ति इन पर निर्भर हो जाता है वो जब तक यह न मिल जाएं तब तक सामान्य ही नहीं हो पाता है जैसे जैसे निर्भरता बढ़ती है नशा न मिलने पर व्यक्ति का पूरा शरीर कांपने लगता है और एक स्थिति में तो नशा न मिलने पर मृत्यु भी हो सकती है। यह समस्या उपचार से दूर हो जाती है। नशा मुक्ति केंद्र मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश और दिल्ली।
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