Sunday, September 15, 2019

जब एक व्यक्ति पहले बार कोई नशा करता है तब निश्चित ही उसे अच्छा महसूस होता है इसी कारण वह दुबारा करता है यह अच्छा लगना उसे एक तरह की शक्ति प्रदान करता है जैसे शराब पीकर वह व्यक्ति भी नाचने लगता है जो शादियों में हमेशा से एक कोने में खड़ा रहता था और शराब पीकर काम बोलने वाला संकोची व्यक्ति भी अपनी बात निःसंकोच करने लगता है। इसी तरह गांजा भी एकाग्रता बढा देता है आजकल छात्रों के बीच रात भर पड़ने के लिए गांजा बहुत लोकप्रिय हो रहा है।
बहुत से खेलों में हम खिलाडियों के डोप टेस्ट में पकडे जाने की घटनाएं सुनते है जिसमे उनके ड्रग्स लेने की बात सामने आती है जो की उनके द्वारा अपना स्टेमिना बढ़ाने के लिए ली जातीं है।
इन बातों को देखकर हम कह सकते है की मादक पदार्थ में गन होता है कि वे कहीं न कहीं शक्ति प्रदान करते है पर दिक्कत इनके एक और गुण से है वो यह है कि ये एडिक्टिव होती है जिस कारण शरीर और मस्तिष्क इनके ऊपर निर्भर होता चला जाता है और जब तक इनके न ले लो शारीर सामान्य रूप से कार्य नहीं कर पाता है। हम देखते है न की जो सिगरेट व्यक्ति को एकाग्रता और ज्यादा देर तक कार्य करने की शक्ति देता है एक दिन ये आता है कि जब तक यह नहीं मिल जाये वह मल त्याग भी नही कर पता है उसको इस अति साधारण प्राकृतिक कार्य के लिए भी सिगेरट की जरूरत पड़ती है। इनकी मात्रा लगातार बढ़ती जाती है। जो व्यक्ति इन पर निर्भर हो जाता है वो जब तक यह न मिल जाएं तब तक सामान्य ही नहीं हो पाता है जैसे जैसे निर्भरता बढ़ती है नशा न मिलने पर व्यक्ति का पूरा शरीर कांपने लगता है और एक स्थिति में तो नशा न मिलने पर मृत्यु भी हो सकती है। यह समस्या उपचार से दूर हो जाती है। नशा मुक्ति केंद्र मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश और दिल्ली।

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