Thursday, September 5, 2019

शराबी या एडिक्ट का परिवार भी मानसिक और शारीरिक रूप से बीमार हो जाता है।

एडिक्शन को एक फॅमिली डिसीज़ कहा जाता है र्थात यदि किसी घर में कोई एडिक्ट हो तो वह जो नशा कर रहा होता है वह तो बीमार होता ही है ( विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार किसी मादक पदार्थ पर शारीरिक और मानसिक रूप से निर्भर हो जाना बीमारी है ) उसके साथ रहने वाला उसका परिवार भी धीरे धीरे मानसिक और शारीरिक रूप से बीमार होता जाता है। इसको हम ऐसे समझेंगे जब कोई व्यक्ति एडिक्शन की बीमारी से ग्रसित हो जाता है तो उसका नशा बढ़ता जाता है और उसके द्वारा घर और बाहर बहुत से काण्ड होते रहते है जैसे घर के बाहर लोगों से और और घर में परिजनों से मार-पीट, वाहन दुर्घटना, पुलिस केस, घर में तोड़ फोड़, नौकरी से निकाल दिया जाना, व्यवसाय में नुकसान, घर का सामान बेच देना, कोई ऐसा काम  जिससे घर की आर्थिक स्थिति खराब कर हो जाये आदि और बहुत से उससे होते रहते है इस सब का प्रभाव परिजनों के मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा होता है।एडिक्ट के घर वाले हमेशा भय में रहने लगते है उनको यही लगता रहता है कि शराबी घर से निकला है तो पता नहीं बाहर क्या करेगा किसी से लड़ न ले कोई उसको मार न दे या वो किसी को न मर दे एक्सीडेंट न हो जाये या जब लौटेगा तो पता नही क्या तोड़ फोड़ या मार पीट करेगा। इसके अलावा आस पास के लोग हमेशा उनके शराबी का मजाक उड़ाते है जिससे वे समाज से कटते जाते है और लोगों का सामना करने से कतराते है, उनमें हीन भावना आ जाती है और डिप्रेशन का शिकार भी हो जाते है। इस भय, चिंता, हीन भावना और सामाजिक रूप से अलग थलग पड़ने के कारण वे शारीरिक रूप से भी बीमार रहने लगते है उनमें बी पी और ह्रदय रोगों की समस्याएं बढ जाती है। एडिक्ट के उपचार के साथ परिजनों को भी काउन्सलिंग और मानसिक उपचार की आवश्यकता होता है।
नशा मुक्ति केंद्र भोपाल, विदिशा, रायसेन, सीहोर, गुना, अशोकनगर, सागर, होशंगाबाद, हरदा, कटनी, दमोह, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, धार, सूरत, वड़ोदरा, बारां, कोटा, सोनभद्र, सिंगरौली, प्रतापगढ़, नरसिंहगढ़, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, राजस्थान।

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