आज तक हम सुनते आये है कि शराब और ड्रग्स ख़राब चीजें है, आइये आज हम जानते है कि शराब और ड्रग्स आखिर है क्या ?
सबसे पहले ड्रग का अर्थ होता है औषधी या दवाई।
हम कुछ प्रसिद्ध या घातक मादक पदार्थों पर चर्चा करते है जैसे शराब जिसे अल्कोहल भी कहते है जिसे मानव द्वारा बनाई गयी सबसे प्राचीन औषधी कहा जाता है का उपयोग आयुर्वेद में आचार्य सुश्रुत जो पहले सर्जन कहे जाते है द्वारा मरीजों को ऑपरेशन के पूर्व दी जाती थी जिससे उन्हें सर्जरी के दौरान दर्द न हो, इसके अलावा बहुत सी टेबलेट जब हम उनका रैपर फाड़ते है तो जो गंध आती है वो अल्कोहल की होती है और कफ सीरप में भी अल्कोहल का उपयोग होता है।
अफीम जिससे स्मैक और हेरोइन बनते है जो की बहुत घातक ड्रग्स होती है वह सरकार द्वारा दवाई बनाने वाली कंपनियों के लिए उगवायी जाती है। अधिकांश मानसिक रोगों जैसे डिप्रेशन, सिजोफ्रेनिया, इंसोमेनिया, फोबिया आदि में अफीम से बनी दवाइयों द्वारा ही उपचार होता है।
गांजे का उपयोग दर्दनिवारक औषधी बनाने में होता है वहीँ इसे नशे के लिए पीकर बहुत लोग पागल होते है।
मार्फिन जैसे दर्दनाशक का उपयोग लोग नशे के लिए करते है।
जिन टेबलेट्स को लोग नशे के लिए करते है वे सभी डॉक्टरों द्वारा विभिन्न मानसिक रोगों में दी जाती है।
आज हमारे यहाँ कफ सीरप का उपयोग नशे के लिए अत्यधिक बढ़ गया है लोग एक दिन में 10 बोतल तक पी जाते है जबकि डॉक्टर ये खांसी होने पर एक बार में 2 चम्मच पीने का बोलता है।
आयोडेक्स को नशे के लिए ब्रेड में लगाकर खाया जाता रहा है।
एल एस डी का अविष्कार शराब छुड़ाने की दवा के रूप में किया गया था आज ये एक घातक नशा है।
इसीलिये कह सकते है की सभी ड्रग्स उपयोगी है पर जब रोग के उपचार की जगह मज़े के लिए इनका दुरूपयोग किया जाता है तब यह घातक है।
Nasha mukti bhopal, raisen, sehore, satna, rewa, shahdol, sidhi, umaria, anuppur, guna, ashoknagar, sagar, hoshangabad, harda, khandwa, khargone, bilaspur, korba, sarguja, tikamgarh, chhatarpur, panna, indore, jabalpur, katni, mandla, ujjain, ratlam, mandsaur, sonbhadra, lalitpur, jhansi.
सबसे पहले ड्रग का अर्थ होता है औषधी या दवाई।
हम कुछ प्रसिद्ध या घातक मादक पदार्थों पर चर्चा करते है जैसे शराब जिसे अल्कोहल भी कहते है जिसे मानव द्वारा बनाई गयी सबसे प्राचीन औषधी कहा जाता है का उपयोग आयुर्वेद में आचार्य सुश्रुत जो पहले सर्जन कहे जाते है द्वारा मरीजों को ऑपरेशन के पूर्व दी जाती थी जिससे उन्हें सर्जरी के दौरान दर्द न हो, इसके अलावा बहुत सी टेबलेट जब हम उनका रैपर फाड़ते है तो जो गंध आती है वो अल्कोहल की होती है और कफ सीरप में भी अल्कोहल का उपयोग होता है।
अफीम जिससे स्मैक और हेरोइन बनते है जो की बहुत घातक ड्रग्स होती है वह सरकार द्वारा दवाई बनाने वाली कंपनियों के लिए उगवायी जाती है। अधिकांश मानसिक रोगों जैसे डिप्रेशन, सिजोफ्रेनिया, इंसोमेनिया, फोबिया आदि में अफीम से बनी दवाइयों द्वारा ही उपचार होता है।
गांजे का उपयोग दर्दनिवारक औषधी बनाने में होता है वहीँ इसे नशे के लिए पीकर बहुत लोग पागल होते है।
मार्फिन जैसे दर्दनाशक का उपयोग लोग नशे के लिए करते है।
जिन टेबलेट्स को लोग नशे के लिए करते है वे सभी डॉक्टरों द्वारा विभिन्न मानसिक रोगों में दी जाती है।
आज हमारे यहाँ कफ सीरप का उपयोग नशे के लिए अत्यधिक बढ़ गया है लोग एक दिन में 10 बोतल तक पी जाते है जबकि डॉक्टर ये खांसी होने पर एक बार में 2 चम्मच पीने का बोलता है।
आयोडेक्स को नशे के लिए ब्रेड में लगाकर खाया जाता रहा है।
एल एस डी का अविष्कार शराब छुड़ाने की दवा के रूप में किया गया था आज ये एक घातक नशा है।
इसीलिये कह सकते है की सभी ड्रग्स उपयोगी है पर जब रोग के उपचार की जगह मज़े के लिए इनका दुरूपयोग किया जाता है तब यह घातक है।
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