Saturday, August 31, 2019

एक बार नशा बंद करने के बाद फिर से शुरू करने के पीछे कारण है बुरा महसूस करना।

एक एडिक्ट का दुबारा नशे की ओर जाने का मुख्य कारण अपने आप में बुरा महसूस करना और इस बुरा महसूस करने के कारण उसका खुद से, परिवार से, ईश्वर से कट जाना उसे अकेला कर देता है इसमें मुख्य कारण बुरा महसूस करने के दौरान उसके द्वारा किया गया गलत व्यवहार होता है।                                   
इसके लिए आवश्यक है कि वो अच्छा करके अच्छा महसूस करे।
हम जिस तरह का व्यवहार दूसरों से करते हैं उससे हमारे अपने आंतरिक हालातों का भी अंदाजा मिलता है । जब हम शांत होते हैं, तब हम निश्चित ही दूसरों के साथ सम्मान और करुणा से पेश आते हैं, लेकिन जब हम किसी नकारात्मक भावना जैसे भय, क्रोध, खुन्नस, निराशा, अपराधबोध या अन्य जो की अपने आप में आध्यात्मिक बीमारियां है के दुष्प्रभाव के कारण अपनी धुरी से कुछ उखड़ा-उखड़ा सा महसूस करते हैं तब हम दूसरों के प्रति असहनशील और धैर्यहीन हो जाते हैं। अगर हम अपनी द्वारा किये जा रहे व्यवहार का लगातार जायजा लें जैसे की कुछ लोग डायरी लिखते है तो हम पाएंगे कि हम अधिकांशतः दूसरों से बुरा व्यवहार उन क्षणों में करते हैं, जब हम अपने आप में बुरा महसूस कर रहे होते हैं।
                      इस बात का दूसरा पहलू यह है कि जब हम दूसरों से अच्छा व्यवहार करते हैं तब हम अपने बारे में अच्छा महसूस करते हैं । जब हम इस रचनात्मक सत्य को नकारात्मक सच्चाई के साथ जोड़कर स्वीकार कर लेते हैं , तभी हम अपने द्वारा किये जा रहे व्यव्हार का परीक्षण सही तरीके के कर के अपनी सही छवि को देख पाते हैं और फिर अलग तरह से व्यवहार करने लगते हैं।
                     
जब-जब हम बुरा महसूस करें , तब-तब हमें कुछ रुक कर ईश्वर से दिशा और शक्ति पाने के लिए प्रार्थना करनी चाहिए और अपने डर, खुन्नस, अपराधबोध, निराश आदि जो की आध्यात्मिक बीमारियां है उसका किसी आध्यात्मिक व्यक्ति की मदद से निदान करें ले तब हम अपने आस-पास के लोगों से नम्रता, शालीनता और उसी लगाव से व्यवहार करने लगते हैं जैसा कि हम अपने साथ चाहते हैं। नम्र होने का फैसला ले लेने से हम उस खुशी और मानसिक शांति को पा सकते हैं, उसे लंबे समय तक बनाए रख सकते हैं और बढा सकते हैं जिसकी हम कामना कर रहे होते हैं। इस तरह से हम अपने चारों तरफ बिखरे लोगों के दिलों में जिस हर्षोल्लास को जगा कर उनकी चेतना को खुशी से भर देते हैं, तो वहीं चेतना हमारे आध्यात्मिक विकास को विकसित करती है।

सिर्फ आज के दिन :  मैं याद रखूँगा कि अगर मैं अपने व्यवहार में बदलाव ले आऊं जिसके लिए मुझे अपनी नकारात्मक भावनाओं को समाप्त करने के लिए भी कार्य करना होगा,तो उसी के अनुसार मेरे विचार भी मेरे कार्यों का अनुकरण करने लगेंगे । कहते है न किसी को माफ़ कर दिया और किसी से माफ़ी मांग ली । माफ़ करने से क्रोध और खुन्नस का निदान होता है और माफ़ी मांगने से अपराधबोध का निदान होता है। आध्यात्मिक बीमारियों के उपचार भी आध्यात्मिक होते है।

- राजीव तिवारी, एडिक्शन काउंसलर।
नशा मुक्ति केंद्र भोपाल, सागर, राजगढ़, सीहोर, छतरपुर, मंडला, सतना, सीधी, शहडोल, अनूपपुर, उमारिया, छिंदवाड़ा, बिलासपुर, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश।
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