भारत में लगभग 28 करोड़ लोग किसी न किसी तरह का नशा कर रहे है जिसमे से 16 करोड़ शराब का और 12 करोड़ अन्य ड्रग्स का नशा कर रहे है। आज हम यह जानेंगे की लोग नशा करते क्यों है ? इसका एकमात्र उत्तर यह है कि नशा कर के अच्छा लगता है। जो भी मादक पदार्थ है जैसे शराब, गांजा, अफीम, स्मैक, हीरोइन, कोकीन, स्लीपिंग पिल्स या अन्य इनमें ये गुण होता है कि जब भी हम इनको लेते है तो हमको मजा आता है इसका कारण है जब इन पदार्थों का प्रभाव मस्तिष्क तक पहुँचता है तो हमारे मस्तिष्क के एक भाग जिसे इंग्लिश में अमिग्डाला (amygdala) और हिंदी में प्रमस्तिष्कखंड कहते है यह इमोशन्स जैसे भय, दुःख या ख़ुशी को महसूस करवाता है के द्वारा एक डोपामाइन (dopamine) नाम का हार्मोन रिलीज़ किया जाता है जिसके मस्तिष्क में स्रावित होने से आनंद या मज़ा महसूस होता है। यह कारण है कि लोग मज़ा लेने के लिए नशे में फंसते चले जाते है क्योंकि ये सभी मादक पदार्थ एडिक्टिव होते है जो की शारीरिक और मानसिक निर्भरता रचित करते है। लंबे समय तक नशा लेने के बाद एक एडिक्ट जब तक नशा न कर ले उसके मस्तिष्क में डोपामाइन रिलीज़ ही नही होता है जिस कारण यदि जब तक वह नशा न कर ले उसको बुरा महसूस होता है चाहे कितनी ही ख़ुशी की बात हो। एक शराबी जो शराब पीकर पड़ोसी की शादी में भयंकर डांस करता है यदि उसके घर में हो शादी हो और वह किसी मजबूरीवश शराब न पी पाये तो उसको देखकर ऐसा लगेगा जैसे वो किसी गमी में शरीक होने आया है। मानसिक रूप से नशे पर निर्भर होने के कारण जब तक वह नशा न कर ले उसको बुरा महसूस होता है इस कारण नशा करना उसकी मजबूरी हो जाती है कि वो चाहकर भी नशा नही छोड़ पाता है। नशा मुक्ति भोपाल, सागर, होशंगाबाद, गुना, नरसिंहपुर, बैतूल, खंडवा, खरगौन, मंडला, ललितपुर, झाँसी, सोनभद्र, दमोह, हरदा, मुरैना, दतिया, ग्वालियर, शिवपुरी, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़। 9981665001
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