Friday, August 30, 2019

नशा करने वाले के जीवन से सब चला जाता है बस नशा रह जाता है।

एक छोटा बच्चा जब अपने किसी दोस्त जो की 90% एक बच्चा ही होता है के कहने पर कि "एक बार कर के देख मज़ा आएगा" शराब या ड्रग्स ले कर देखता है तो निश्चित उसको अच्छा लगता है क्योंकि ये मष्तिष्क में अच्छा लगने वाला प्रभाव उत्पन्न करते है। इस अच्छे प्रभाव के कारण वो मासूम बच्चा इनको लेने लगता है और धीरे धीरे जब ये चीजें बढ़ती जाती है तो उनके दुष्प्रभाव दिखने शुरू होते है औरउसका जीवन भी प्रभावित होने लगता है। नशा शुरू करने से पहले उसके जीवन में मस्ती, आनंद, संबंध, सपने, परिवार, ख़ुशी, स्वस्थ शरीर,पढ़ाई या काम सभी कुछ होता है और उसका जीवन एक उपयोगी जीवन होता है किंतु जब नशा बढ़ता है तो सबसे पहले उसके जीवन से पढ़ाई या काम जाता है फिर जब उससे नशे के प्रभाव में निरंतर गलत व्यवहार  होते है तो उसके सम्बन्ध खराब होते है और सम्मान जाता है, नशे के कारण उसके बचपन के अच्छे दोस्त उससे दूर हो जाते है, निरंतर गलतियों के कारण उसका अपने पर से विश्वास काम होता जाता है और उसके कुछ बनने या करने के सपने धूमिल होते जाते है, निरंतर नशे की मात्रा बढ़ती जाती है जिसका उसके शरीर खराब होता जाता है और वो बीमार रहने लगता है, एडिक्शन की बीमारी के कारण व्यक्ति आध्यात्मिक रूप से भी बीमार हो जाता है जिससे उसका चारित्रिक पतन भी होता जाता है, नशे के प्रभाव के कारण वह स्वार्थी हो जाता है वह अपने चाहने वालों की भावनाओं को नही समझ पाता है जो लोग उसका भला चाहते है वो ही उसको अपने दुश्मन नजर आने लगते है उसकी भावनाएं विकृत हो जाती है भावनात्मक रूप से मृत हो जाता है। उसके जीवन में सिर्फ नशा रह जाता है बाकी सब कुछ चला जाता है।
राजीव तिवारी, एडिक्शन काउंसलर, भोपाल, सागर, होशंगाबाद, रीवा, सतना, शहडोल, सीधी, उमारिया, अनूपपुर, कटनी, सिंगरौली, ललितपुर, मंडला, सोनभद्र, झाँसी, विदिशा, सीहोर, रायसेन, नरसिंहपुर, छतरपुर, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान।

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