Thursday, August 29, 2019

नशा बंद करे व्यक्ति के दुबारा नशा शुरू करने की संभावना हमेशा बनी रहती है।

एडिक्ट को नशे बंद किये हुए चाहे कितना भी समय हो जाये पर उसकी दुबारा नशा करने की संभावना कभी समाप्त नही होती है । एडिक्ट हो जाना यानि एडिक्शन नाम की बीमारी से पीड़ित होना जो एक लाईलाज बीमारी है। जो एक बार एडिक्ट हो गया वो हमेशा एडिक्ट रहता है ये बीमारी कभी ख़त्म नही होती है। नशा मुक्ति के उपचार के बाद भी नशा करने संभावना हमेशा बनी रहती है चाहे उसे नशा बंद किये हुए कितना भी समय हो जाये। मैंने 20 साल तक लगातार ढेर सारा नशा किया जिसमें से मुझे केवल 4 साल तक मज़ा आया और फिर जब मैंने छोड़ने का सोचा तो उसके बाद मुझे बाहर निकले में 16 साल और लग गए। आज मुझे नशे से दूर 7 साल हो गए है और लगभग 7 साल से ही मैं भोपाल, मध्य प्रदेश में नशा मुक्ति के क्षेत्र से जुड़ा हूँ पर आज मैं ये बात बहुत अच्छे से जनता हूँ की मैं कभी भी दुबारा नशा करना चालू कर सकता हूँ इसका कारण ये है कि नशा करने से जो मज़ा आता है वो दिमाग में लॉक हो जाता है और जब कभी नशा छोड़े हुए एडिक्ट के जीवन में कोई बहुत बुरी या बहुत अच्छी बात होती है तो उसका दिमाग सीधे नशे की ओर जाता है। आज मैं विभिन्न नशा मुक्ति के सेमिनारों में जाता हूँ तो देखने में आता है कि किसी ने 1 साल, किसी ने 5 साल और किसी ने 15 साल बाद दुबारा नशा कर लिया जबकि वे लंबे समय नशा मुक्ति केंद्र में भी रहे होते है। इस कारण मज़े के लिए पहली बार नशा करके देखना बहुत खतरनाक हो सकता है आपकी पूरी ज़िन्दगी नशे में बीत सकती है इसमें फंसने का एकमात्र कारण किसी के कहने पर एक बार नशा कर के देखना होता है फिर यह जीवन भर का नासूर बन सकता है। जहाँ ये शुरू में शौक रहता है फिर ये मजबूरी बन जाता है न चाहते हुए भी करना पड़ता है।
निश्चित रूप से आजीवन नशा दुबारा न करने के उपाय है और इन उपायों को आजीवन करते रहना होता है। आज मैं 7 साल बाद भी अल्कोहोलिक्स एनोनिमस जो की नशा पीड़ितों के स्व सहायता समूह होते है में नशे से मुक्त रहने के लिए जाता हूँ। आज भी दिमाग में एक अलर्ट बना कर रखता हूं कि आज के दिन पी सकता हूँ इसीलिए जहाँ नशा हो रहा होता है वहां नही जाता हूं।

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