Thursday, August 29, 2019

अचानक नशा बंद करने के दुष्परिणाम


अचानक नशा बंद करने के दुष्परिणाम

ये बात शायद सभी के गले से आसानी से न उतरे की नशा बंद करने से जान भी जा सकती है क्योंकि हम तो बचपन से सुनते आये है कि नशा करने से जान जाती है। जी हां दोस्तों यह बात बिलकुल सही है कि नशा छोड़ने से भी जान जाने की संभावना रहती है। 
एडिक्ट या लती होना वह अवस्था है जब व्यक्ति अपने नशे के ऊपर मानसिक और शारीरिक रूप से निर्भर हो जाता है और विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 1964 में एडिक्शन को अर्थात निर्भरता बन जाने को बीमारी घोषित किया है।
शारीरिक रूप से नशे के ऊपर निर्भर होने पर नशा एकदम से बंद करने पर शरीर प्रतिक्रिया ( react ) करता है जैसे जोड़ों का दुखना, जुकाम हो जाना, बैचेनी, एंजाइटी, नींद न आना, उलटी होना आदि इसे विथड्रावल सिंड्रोम ( withdrawal syndrome)कहते है यह निर्भरता की प्रथम स्थिति है।निर्भरता की दुसरीं स्थिति में अचानक नशा बंद करने पर व्यक्ति स्थान, व्यक्तियों और टाइम से अनभिज्ञ हो जाता है और उसको तरह तरह का भ्रम होता है और आवाजें भी सुनाई देने लगती है इसको हल्लुसिनेशन (hallucinations) कहते है।
निर्भरता की तीसरी स्थिति व्यक्ति की शारीरिक निर्भरता चरम पर होती है तथा अचानक नशा बंद करने पर उसको कार्डियक अटैक आ सकता है और वो कोमा में भी जा सकता है इस स्थिति को जिसमे अचानक नशा बंद करने पर जान भी जा सकती है उसे डिलिरिम ट्रेमेन्स ( delirium tremens or DTS) कहते है।
शारीरिक निर्भरता एक बीमारी है इस स्थिति में चिकित्सक द्वारा उपचार की आवश्यकता होती है बहुत से लोगों की मृत्यु उनके परिवार द्वारा उनको नशा करने से रोकने के लिए घर में बंद करने के कारण हो जाती है या बहुत बार पुलिस स्टेशन में भी एडिक्ट्स की मृत्यु का कारण यहॉ होता है। ये स्थिति सिंथेटिक ड्रग्स और शराब में अधिकांश होती है।

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