Friday, December 27, 2019

नशा व्यक्ति के विचार, व्यवहार और भावनाओं को विकृत कर देता है

नशा या एडिक्शन एक ऐसी बीमारी है जो इसके पीड़ित के शरीर के साथ साथ उसके विचार, व्यवहार और भावनाओं को भी विकृत कर देती है। इसके पीड़ित के विचार विकृत हो जाते है उसके विचार आत्मकेंद्रित और स्वार्थी हो जाते है जिस कारण वह सिर्फ अपने बारे में सोचता है और उसके विचार पूरी तरह से नकारात्मक हो जाते है वह हर कार्य, लोगों और परिस्थितियों में बुराई सबसे पहले ढूंढता है। व्यक्ति का व्यवहार पूरी तरह से उसके विचारों पर निर्भर होता है जिस व्यक्ति के विचार नकारात्मक हो जाते है उसका व्यवहार में भी नकारात्मकता हावी हो जाती है वह वो कार्य करने लगता है जो शायद वो खुद भी न करना चाहे, नशैलची को आप घर और बाहर लोगों से छोटी छोटी बातों पर लड़ते, बहस करते, तोड़ फोड़ करते देख सकते है इसके साथ साथ वो लोगों की बुराई करने लगता है कमियां निकलने लगता है और उसकी किसी के साथ नहीं पटती है। वह हर कार्य में नकारात्मक पक्ष पर ज्यादा जोर देने लगता है। जैसे जैसे एक व्यक्ति का नशा बढ़ता जाता है उसकी भावनाएं भी विकृत या ख़राब होती जाती है जिसके कारण वह हमेशा अकेलापन, अधूरापन और बैचेनी महसूस करता है और इसका कारण उसके अंदर नकारात्मक भावनाएं जैसे क्रोध, खुन्नस, भय, घृणा, अपराधबोध, हीनभावना और जलन इत्यादि भावनाओं का प्रबल होना होता है।
एक नशैलची को नशा बंद न कर पाने और दुबारा नशे  की और ले जाने में सबसे बड़ा हाथ उसकी नकारात्मक भावनाओं का होता है इसीलिए उसके भय, खुन्नस, अपराधबोध और हीनभावना के समाधान की भी आवश्यकता होती है जिसको काउन्सलिंग और साइकोथेरेपी के माध्यम से दूर किया जा सकता है। शुद्धि नशा मुक्ति केंद्र में मरीज के विचार और भावनाओं पर भी कार्य किया जाता है जिससे वे अच्छा महसूस करने लगते है और नशे से दूर बने रहते है।
Rajeev tiwari 9981665001
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Sunday, December 8, 2019

नशा क्या है ?

सामान्य बोल चाल की भाषा में शराब, गांजा, स्मैक, टेबलेट या अफीम आदि को नशा कहा जाता है किंतु चिकित्सकीय भाषा में ये सभी ड्रग्स है और इन सबका औषधीय उपयोग है जैसे अल्कोहोल, गांजा और अफीम का उपयोग दवा बनाने वाली कंपनियों द्वारा दवा बनाने में किया जाता है और लोगों द्वारा बहुत सी दवाएं जैसे नेटराबेट 10, विलियम 10, मार्फिन आदि का उपयोग नशे में किया जाता है। ये सब दवाएं है तो नशा क्या है ? चिकित्सा शास्त्र के अनुसार नशा अर्थात एडिक्शन ये एक बीमारी है ये जिसको हो जाती है वह किसी पदार्थ का अनियंत्रित उपयोग करने लगता है या कोई कार्य/ व्यवहार बार बार करने लगता है इसके कारण उसका जीवन अस्त व्यस्त हो जाता है। एडिक्शन को मुख्यतः दो भागों में बांटा जाता है:-
1. सब्स्टेन्स एडिक्शन या पदार्थ का नशा ;
2. बिहेवियरल एडिक्शन या व्यवहार का नशा।
पदार्थ के नशे में शराब, गांजा, चरस, अफीम या अन्य भौतिक पदार्थ का अनियंत्रित उपयोग होता है और वह शारीरिक और मानसिक रूप से पदार्थों पर निर्भर हो जाता है और जब बंद करना चाहता है तो उसे शारीरिक और मानसिक कष्ट होता है जिस कारण वो चाह कर भी इन्हें बंद नही कर पाता है। बेहविओरल या व्यवहार के नशे में जुआ, सोशल मीडिया, सेक्स, वीडियो गेम जैसे पब्जी आदि आते है इनकी मानसिक निर्भरता होती है व्यक्ति को केवल यह करने पर ही अच्छा लगता है और वो चाह कर भी इनको बंद नहीं कर पाता है चाहे इस कारण उनका कितना भी नुकसान हो रहा हो। आपने कई जुआरियों को देखा होगा अपना सब जुए में बर्बाद कर लेते है फिर भी बंद नहीं कर पाते है। आज निम्हान्स में एक सोशल मीडिया एडिक्शन वार्ड अलग से खुल गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी सोशल मीडिया के एडिक्शन को बीमारी घोषित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

बस एक दिन के लिए नशा बंद

नशे से मुक्ति हेतु अमेरिकन फ़ेलोशिप अल्कोहोलिक्स एनोनिमस ने "एक बार में एक दिन" की नई अवधारणा दी जो सबसे सफल साबित हुई है। कहावत ह...